साल 1998 जब देश मे अगर कोई कार खरीदता तो उसे अमीर माना जाता था. ये एक एसा वक्त थाय के अगर कीसी को डिझल कार खरीदनी हो तो बजेट पहेले देखता था. हर कीसी को डिझल कार पंसद तो आती लेकीन कोई अफोर्ड नही कर सकता था. लेकीन उस वक्त रतन टाटा लंबे समय से कुछ एसा करने की प्लानींगमे थे की जीस वजह से भारत का पूरा ओटोमोबाईल सेक्टर ही गया छे.
1999 की शुरुआतमे रतन टाटाने पुणेमे हुए ओटो एक्सपोमे टाटा टेल्को की पहेली डिझल हेचबेक कार ईन्डिका लोन्च की थी. उस वक्त टाटा मोटर्स का नाम टाटा टेल्को था. ओर टाटा टेल्को कंपनी उस वक्त कार नही पर बस ओर ट्रक जेसे कोमर्शियसल व्हिकल ही बनाया करती थी. यही वजाह थी लोगो की नझरे भी ईसी गाडी के लोन्च पर टीकी हुई थी.
रतन टाटाने ही पहेली बार ईन्डिका लोन्च कि थी ओर जेसे ही, ये कार लोन्च हुई के एक साथे ईसके 1 लाख 15 हजार जीतने ओर्डर आये थे. उस वक्त पर टाटा टेल्को यानी की टाटा मोटर्सने ये कार सिर्फ 2.6 लाख मे लोन्च की थी. वक्त साथ ईसका अपडेट मोडलमे लोन्च किया गया था. जीसका नाम ईन्डिका वी2 रखा गया था. ओर फीर ये कार लोगो को सबसे फेवरीट कार बन गई थी.
तकरीबन 20 साल तक ईस कारने भारत के मार्केट मे राज किया था. ईन्डिका वी2 के बाद टाटाने ईसका नाम बदल कर ईन्डिका विस्टा रखा ओर नया मोडल लोन्च किया था. लेकीन फिर टाटा की नये नोडल भी कंपनीने लोन्च किये थे ईस वजाह से 2018मे कंपनीने ये मोडल बंध कर दिया था. आज मार्केट मे टाटा की अल्ट्रोस कार हे जो की पर्फेक्ट हैचबेक कार मानी जाती है. साथ ही मे बजेट सेगमेंट मे टाटा की टिआगो कार हे जो वोभी काफी सक्सेस कार है.