जब भारत के मार्केट मे कार की डिमान्ड सबसे ज्यादा थी. तब मीडल क्लास आदमी कार को अफोर्ड कर सके एसी स्थिती भी नही थी. सभी कारे बडी किंमत पर बीक रही थी. लेकीन उसी व्कत रतन टाटाने सपना देखा था के देशमे हर आदमी गाडी खरीद सके एसा कुछ करना चाहीए. सबसे ज्यादा भारतमे मीडक क्लास फेमेली के लोग रहे ते ओर उन्ही के पास कार नही है.
यही वजाह थी की रतन टाटाने टाटा नेनो का सपना देखा था. जब ये कार मार्केटमे आईथी तब तहेलका मचा दीया था. सीर्फ एक लाख रुपिये मे कार यानी के एक एक्टिवा के किंमत मे आपको उस वक्त कार मील रही थी. यही वजाह थी मार्केटमे नेनो आने के बाद दुसरी सारी कंपनीया टेन्शन मे आ गई थी. आज भी कई लोग एसे हे के जो रोड पर आपको नेनो चलाते हुए दीख जायेंगे
ये कार कंपनीने सीर्फ ईसी लीये बनाईथी के मीडल क्लास लोगभी कार को अफोर्ड कर सके. लेकीन वक्त के साथ साथे ईस कार मे दिक्कते आने लगी थी. लेकीन एसा नही था के दिक्कते हल न हुई हो. कंपनीने हर दिक्कतो को हल किया था. कार का बेझ वेरिअंट आपको 1 लाख मे पडता था. बाकी उपर के वेरिएंट 3 लाख तक जाते थे. ओऱ लोगो ने जी भर के ये कार खरीदीभी थी.
वक्त के साथ साथ मार्केट मे दुसरी कंपनीया आती गई ओर फीर एक वक्त एसा आया के लोग नेनो को छोड दुसरी कंपनीओ की कार खरदीने लगे थे. लेकीन ये चीझ भी ईसी वजाह से हुई थी क्योकी नेनो ने मार्केट मे एन्ट्री ली थी. आज एक मीडक क्लास आदमीभी कार को खरीद सकता हे एसी सस्ती गाडीयभी मार्केट मे अवेलेबल है. यही वजाह हे. आज रतन टाटा हमारे बीच नही रहे. पर उनके देखे हुए सपने उन्होने हमेशा सच किये है.
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